बिज़नेस: केंद्र सरकार ने नए Employees’ Provident Fund Scheme, 2026 में EPF योगदान को लेकर एक महत्वपूर्ण इमरजेंसी प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत महामारी, एंडेमिक या राष्ट्रीय आपदा जैसी असाधारण स्थिति में सरकार कर्मचारी के योगदान, नियोक्ता के योगदान या दोनों को अस्थायी रूप से घटाने या टालने का आदेश दे सकती है। यह राहत अधिकतम तीन महीने के लिए एक बार में दी जा सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों का PF योगदान अपने आप कम हो जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार को अलग से आदेश जारी करना होगा और यह व्यवस्था पूरे देश या किसी खास क्षेत्र में लागू की जा सकती है। सामान्य परिस्थितियों में EPF की मौजूदा योगदान व्यवस्था जारी रहती है।
अगर किसी आपदा के दौरान कर्मचारी का EPF योगदान घटाया जाता है, तो उसकी सैलरी से PF के रूप में कम रकम कटेगी। इससे उस समय कर्मचारी के हाथ में आने वाली रकम बढ़ सकती है और आर्थिक संकट के दौरान तत्काल राहत मिल सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, PF खाते में जमा होने वाली राशि भी कम हो जाएगी। इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बनने वाले कुल PF कॉर्पस पर असर पड़ सकता है।
नियोक्ता के योगदान में कटौती या स्थगन होने पर भी PF में जमा रकम कम हो सकती है। वहीं, पेंशन पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार का आदेश किस योगदान को कितनी अवधि के लिए बदलता है और संबंधित कर्मचारी की स्थिति क्या है। इसलिए इसे स्थायी नियम या स्थायी PF कटौती नहीं माना जाना चाहिए।
नए नियम का उद्देश्य असाधारण परिस्थितियों में सरकार को सीमित अवधि के लिए आर्थिक राहत देने की सुविधा प्रदान करना है। सामान्य समय में EPF की नियमित व्यवस्था लागू रहेगी।
